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साप्ताहिक राशिफल (30 जुलाई 2018 से 5 अगस्त 2018)

श्री श्रीजी शक्तिपीठ मथुरा मांगलिक कार्य व ज्योतिष फलित केंद्र  साप्ताहिक राशिफल (30 जुलाई से 5 अगस्त) मेष राशि का साप्ताहिक राशिफल  (30 जुलाई से 5 अगस्त) इस सप्ताह आपके लिए धन लाभ के मार्ग खुलेंगे और आप उन अवसरों का लाभ उठा कर अच्छा धन लाभ अर्जित करेंगे। पारिवारिक जीवन में कुछ असंतुष्टि रह सकती है और इसकी वजह घर में तनाव का माहौल रहेगा। अपने माता-पिता की सेहत का ध्यान रखें क्योंकि उन्हें स्वास्थ्य समस्याएं परेशान कर सकती हैं। कार्यक्षेत्र में आपका दबदबा बढ़ेगा हालांकि पारिवारिक समस्याओं का असर आपके काम पर भी पड़ सकता है। सप्ताह के मध्य में कुछ खर्च बढ़ सकते हैं लेकिन सप्ताहांत तक नियंत्रण में आ जाएंगे। संतान के लिए समय अच्छा रहेगा लेकिन पारिवारिक क्रियाकलापों का उन पर असर पड़ सकता है इसलिए उन्हें इस सब से दूर रखने का प्रयास करें। विद्यार्थियों के लिए समय चिंतन करने का है उन्हें और अधिक मेहनत करनी होगी व किसी भी परेशानी से घबराना नहीं है। वृष राशि का साप्ताहिक राशिफल (30 जुलाई से 5 अगस्त) इस सप्ताह आप प्रसन्नचित रहेंगे और मानसिक रूप से खुद को सशक्त महसूस क...

क्‍यों करते हैं हम परिक्रमा, किस देवता की कितनी परिक्रमा करें

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क्‍यों करते हैं हम परिक्रमा, किस देवता की कितनी परिक्रमा करें हिन्दु धर्म में देवी देवताओं की पूजा अर्चना के साथ साथ उनकी परिक्रमा का भी बहुत महत्व बताया गया है । अपने दक्षिण भाग की ओर से चलना / गति करना परिक्रमा कहलाता है। परिक्रमा में व्यक्ति का दाहिना अंग देवता की ओर होता है। हमेशा ध्यान रखें कि परिक्रमा सदैव दाएं हाथ की ओर से ही प्रारंभ करनी चाहिए, क्योंकि दैवीय शक्ति के आभामंडल की गति दक्षिणावर्ती होती है।  बाएं हाथ की ओर से परिक्रमा करने पर दैवीय शक्ति के आभामंडल की गति और हमारे अंदर विद्यमान परमाणुओं में टकराव पैदा होता है, जिससे हमारा तेज नष्ट हो जाता है। जबकि दाएं हाथ की ओर से परिक्रमा करने पर उस देवी / देवता की कृपा आसानी से प्राप्त होती है।  हिन्दू शास्त्रों में देवी-देवताओं की परिक्रमा के नियम प्रगतं दक्षिणमिति प्रदक्षिणं’ के अनुसार अपने दक्षिण भाग की ओर गति करना प्रदक्षिणा कहलाता है। प्रदक्षिणा में व्यक्ति का दहिना अंग देवता की ओर होता है। इसे परिक्रमा के नाम से प्राय: जाना जाता है। पूजा-अर्चना आदि के बाद भगवान की मूर्ति के आसपास सकारात्मक ऊर्जा एकत्...

कलावा (मौली) क्यू बाधा जाता है व इसका धार्मिक व वैज्ञानिक कारण क्या है

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कलावा(मौली) क्यू बाधा जाता है व इसका धार्मिक व वैज्ञानिक कारण  क्या है   हिंदू धर्म में किसी धार्मिक अनुष्ठान हो या पूजा-पाठ लगभग सभी अवसर पर लोग अपने हाथ की कलाई पर लाल धागा बांधते हैं, जिसे अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नाम से जाना जाता है। कई लोग इसे 'मौली' करते हैं, तो कई लोग कलावा और कंगन के नाम से भी जानते हैं। लेकिन क्या आप इस बात को जानते हैं कि आखिर पूजा-पाठ के बाद मौली यानी कलावा क्यों बांधते हैं, इसका क्या महत्व है। अगर आपका जवाब नहीं है तो चलिए आज आपको इस सवाल से छुटकारा देते हुए कलावा के महत्व को लेकर कुछ जरूरी बाते बताते हैं। आपको बता दें कि कलावा को रक्षा सूत्र भी कहा जाता है कि इसे बांधने के धार्मिक महत्व के साथ-साथ वैज्ञानिक महत्व भी है। क्या है रक्षा सूत्र का महत्व;-  "येन  बद्धो बली  राजा  दानवेन्द्रो  महाबलः। तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे माचल  माचल।।"  अर्थ :-   जिस  रक्षासे  महाबली  दानवेन्द्र बली राजा बांधा था तुझे  मैं उसीसे बांधता  हूँ।          ...